मोनालिसाक आँखिक चर्चा मिथिलाधरि

मोनालिसाक आँखिक चर्चा मिथिलाधरि
देबेन्द्र यादव देबेन्द्र यादव २०८१ माघ ७, सोमबार १५:०८
मोनालिसाक आँखिक चर्चा मिथिलाधरि

जिसने तुम्हे देखा भी नही ।
उसने भी तेरी तारीफ कर दी ।।
हिन्दीक कोनो कविक ई पाँती अछि । कुम्भमे जे नहिओ गेल छथि ओ मोनालिसाक चर्चा कऽ रहल छथि ।
ई दृश्यमे एकटा लड़की अछि । हुनका हाथमे किछु माला अछि । ओ माला बेचएकेँ काज करैत छथि । हिनक सुन्दरताकेँ एखन नेपाल भारतक पूरे लोक दिवाना अछि । जतए ततए हिनक आँखिक चर्चा भऽ रहल अछि । मोनालिसा हिनक नाम अछि हिनक मुस्कान आ आँखि देखबाक चर्चा एखन जोड़सँ चलि रहल अछि ।
जलील मानिकपुरीक एकटा शायरी अछि –
मैं डर रहा हूँ तुम्हारी नशीली आँखों से
कि लूट लें न किसी रोज कुछ पिला के मुझे

जाहि गतिमे हिनक चर्चा बढ़ल अछि, कुम्भमे साधुसन्तक चर्चा हेरा गेल अछि । जतए–ततए मोनालिसाक दिवानगी देखल जा रहल अछि । कुम्भमे जाएवलासभ एखन सभसँ बेसी हिनके देखए जाइत अछि । हिनक प्रशंसा करैत लोक नहि थकैत अछि ।
झील अच्छी कमल का फूल अच्छा की जाम अच्छा
है तेरी आंखो के लिए कौन सा नाम अच्छा ।


प्रयागराजक कुम्भमे ई माला बेचए आएल छलथि मुदा हिनक लोक माला नहि एक नजरि देखबाक लेल भीड़ लागल अछि । भारतक इंदोरसँ मोनालिसा मातापितासंग माला बेचए आएल छथि ।


हिनक एकटा विशेषता अछि हिनक सहजता । सुन्दर देखबाक लेल लोक अंग प्रदर्शन करैत अछि मुदा ई पूरा कपडामे छथि । कतहुँ अशिष्टा नहि, हरेक समय मुस्कैत रहैत छथि । हिनक सुन्दरता आ आँखिक चर्चा एखन टिभि आ सामाजिकसञ्जालक माध्यमसँ घर–घरमे भऽ रहल अछि । ई चर्चासँ मिथिलाक लोकसँ अनभिज्ञ नहि छथि । हिनक फोटो आ भिडियो लाखोमे सेयर भऽ रहल अछि ।


एकटा शायरीसँ ई प्रसंग अन्त्य करए चाहैत छी –
जो उनकी आंखों से बयां होते हैं,
वो लफ्ज शायरी में कहां होते है ।